Thursday, September 27, 2018

दया

दया


                                                                  दया

                  यह महात्मा बुद्ध के जीवन की एक घटना है। एक गडरिया भेड़ बकरियों के झुंड को लेकर जा रहा था। झुंड में एक बकरा लंगड़ा था और वह धीरे धीरे चलता था। चरवाहा उसको झुंड के साथ मिलाने के लिए डंडे मारता था। महात्मा बुद्ध यह देखकर बहुत दुखी हुए। उन्हें बकरे पर दया आ गई। उन्होंने चरवाहे से पूछा कि आप कहां जा रहे हो। चरवाहे ने कहा कि जो सामने पहाड़ी है मैं वहां पर जा रहा हूं।महात्मा बुद्ध ने कहा यदि मैं इस लंगड़े बकरे को उठाकर वहां छोड़ आऊं तो तुम्हें कोई एतराज तो नहीं होगा। चरवाहा मुस्कुराते हुए बोला "नही"। महात्मा बुद्ध ने बकरे को उठाया और पहाड़ी पर झुंड में छोड़ दिया।

              यह दिखाता है कि महान लोगों का हृदय दया  से भरा होता है। वे सभी जीवो को दया  की दृष्टि से देखते हैं।  वह हर जगह कुदरत के नूर को पाते हैं।  
          "जब हम किसी पर दया  करते हैं, तो परमात्मा के एक छोटे से गुण को अनुभव करते हैं।"