मुझे याद रखने के लिए

मुझे याद रखने के लिए


मुझे याद रखने के लिए



मेरी आँखें उस आदमी को दे देना जिसने कभी उगता हुआ सूरज न देखा हो ,
 और न ही किसी नन्हें - मुन्ने का मासूम चेहरा , या फिर नारी की आँखों में अगाध प्रेम । 
मेरा दिल उसे देना जिसके दिल ने उसको सिवाय पीड़ा के और कुछ न दिया
 मेरा खून उस नौजवान को देना जिसे जख्मी हालत में उसकी गाड़ी के मलबे में 
से निकाला गया हो , ताकि उम्र पाकर वह अपने पोते - पोतियों को खेलता । 
देख सके मेरे गुर्दे उसे देना जो हफ्ते दर हफ्ते मशीन के आधार पर ही 
जिन्दा रह रहा हो । मेरा मांस , मेरे शरीर की हर हड्डी , हर रेशा , हर नाड़ी निकाल लो लेकिन कोई |
 ऐसा तरीक़ा खोज निकालो जिससे एक अपाहिज बच्चा चल सके । 
मेरे दिमाग का हर कोना खोज लो , जरूरत पड़े तो मेरी कोशिकायें भी ले 
लो और उन्हें पनपने दो ताकि किसी दिन कोई गुंगा बच्चा पक्षी की आवाज़ सुनकर 
खुशी से चिल्ला उठे और कोई बहरी बच्ची खिड़की पर 
टपकती वर्षा की बूंदों की टप - टप सुन सके । 
मेरे बचे - खुचे शरीर को जलाकर उसकी राख हवा में 
बिखेर देना ताकि उस  राख से फूल खिल सके । 
अगर तुम्हें कुछ दफ़नाना ही है तो दफ़ना देना मेरी कमियाँ , मेरी कमजोरियाँ । 
और दूसरों के लिए मेरे दिल में बसी तमाम रंजिशें । 
मेरे पाप शैतान को दे देना । मेरी आत्मा परमात्मा को दे देना । 
अगर कभी मुझे याद करना चाहो तो किसी जरूरतमन्द को 
अपने दो मीठे बोलों और मदद का सहारा दे देना । 
अगर तुम वही करोगे जो मैंने कहा है तो मैं अमर हो जाऊँगा ।         
                            – रॉबर्ट एन . टेस्ट

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