Thursday, November 15, 2018

असफलताएँ सीख देती हैं


असफलताएँ सीख देती हैं
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                   असफलताएँ असहज नहीं हैं यह पीड़ादायक भी नहीं है यह अनुभवी लोगों के लिए एक अवलेख है । दृढ़ता से असफलताओं के कारणों को समझना और उसे अंगीकृत करना जीत की ओर कदम बढ़ाना है । असफलताएँ सीख देती हैं यह नए पन की ओर ले जाती हैं । सफलता का तर्क आसान है पर यह हमारे अनुभवों और प्राप्त सीख से वंचित रह जाती हैं ।संघर्ष कठिन है पर संघर्ष से । उबरा मनुष्य अधिक परिपक्व , अधिक भद्र और अधिक जागरूक होता है । बार - बार की असफलता से ऊबना नहीं चाहिए , इससे उबरने मात्र को चेतना अपने भीतर जागृत करना बेहतर कदम है । कई कामयाब और महान व्यक्तियों ने अपने जीवन की असफलताओं से जीवनानुभव तथा परिपक्व चेतना पूर्ण दृष्टि प्राप्त की ।

असफलताएँ सीख देती हैं
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                      विस्टन चर्चिल, , वर्ष 1951 से । 1955 तथा 1240 से वर्ष 1945 के दो कार्यकाल में ब्रिटेन के  प्रधानमन्त्री रहे थे । वर्ष 1953 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार उन्हें प्रदान किया गया । एक महान वक्ता दृढतापूर्ण नेतृत्व के लिए याद किए जाने वाले विस्टन चर्चिल का इस मुकाम तक पहुँचना इतना । असहज था कि चर्चिल ने स्वयं ही एक बार कहा - ' मैं भाग्य का पुत्र हूं '। एक कमजोर विद्यार्थी के रूप में उनका आरम्भिक जीवन बीता । छठी कक्षा की परीक्षा वे पास नहीं कर पाए । स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी परीक्षाओं में  उनका प्रदर्शन हमेशा खराब रहा । हैरी स्कूल के शिक्षक यह शिकायत करते थे कि चर्चिल विषय को समझने में सक्षम नहीं हैं और कक्षा में उनका प्रदर्शन स्तरहीन है ।
  उनके पिता रैडोल्फ चर्चिल ने उन्हें सेना में जाने की सलाह दी । रॉयल मिलिट्री में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा में भी वह तीसरी बार ही सफल हो सके । प्रधानमन्त्री बनने से । पहले वह कोई चुनाव भी नहीं जीत पाए थे । ब्रिटिश सेना में शामिल होने के बाद चर्चिल दुनिया के कई देशों में अभियानों पर गए । इस दौरान वह वर्ष 1996 में भारत भी आए । अभियानों के दौरान चर्चिल को लगा कि उनके पास तैद्धान्तिक ज्ञान की कमी है और तब उन्होंने स्व शिक्षण ( Self Education ) की ओर कदम बढ़ाया । उन्होंने प्लेटो , एडम स्मिथ , चाल्र्स डार्विन , हेनरी इलाम , एडवर्ड गिबन जैसे रचनाकारों को पढ़ा । उन्होंने पत्र - पत्रिकाओं में अपने अभियानों के बारे में लिखना आरम्भ किया । इसी प्रक्रिया में उन्होंने पुस्तकें लिखी और एक महान लेखक तथा राजनेता ब्रिटेन को प्राप्त हुआ । विस्टन चर्चिल एक उदाहरण है । पढ़ाई में कमजोर तथा परीक्षाओं में बार - बार असफल रहने की प्रवृत्ति से उबरा जा सकता है । और यह स्व शिक्षण ' से सम्भव है  स्कूली शिक्षा के खराब होने या असफलता को अपना । हथियार बनाना जरूरी है । यही कामयाबी की ओर ले जाता है । विंस्टन चर्चिल सीखने की ललक के प्रतीक है । संघर्ष की कहानी है उनका जीवन ।
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